What is FTP in hindi | FTP kya hai

क्या आपने कभी फ़ायरफ़ॉक्स या किसी अन्य एप्लिकेशन का नया वर्शन डाउनलोड किया है? अगर ऐसा है, तो आपने शायद इसे जाने बिना भी FTP (File Transfer Protocol) का इस्तेमाल किया होगा। 

आजकल के ब्राउज़र के माध्यम से, हम ब्राउज़र विंडो के अंदर से FTP के माध्यम से फ़ाइलें डाउनलोड कर सकते हैं। फ़ाइलों को डाउनलोड करने के लिए यह बहुत आसान और सुविधाजनक है। लेकिन ब्राउजर से भी कुछ फाइल्स को डाउनलोड करते समय ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी उपलब्ध नहीं होती है, हम फाइल अपलोड नहीं कर सकते हैं। इसलिए, हम फ़ाइलों को स्थानांतरित करने के लिए FTP क्लाइंट का उपयोग कर सकते हैं। तो, इस लेख में, हम सीखेंगे कि FTP यानि फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल कैसे काम करता है।

What is FTP in hindi | FTP kya hai
What is FTP in hindi | FTP kya hai

FTP (File Transfer Protocol) Defination | FTP की व्याख्या :

फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल यह प्रोटोकॉल्स का एक सेट है जो नेटवर्क से कनेक्टेड हर एक कंप्यूटर द्वारा इंटरनेट पर बात करने के लिए युज करते हैं। अधिक सरल शब्दों में, यह दो कंप्यूटरों को जोड़ने और उनके बीच फ़ाइलों को ट्रांसफर करने का एक तरीका है। एफ़टीपी नए वेब पेजों की अनुमति देता है जो किसी यूजर द्वारा इंटरनेट पर दिखाने के लिए बनाए जाते हैं। यह वेब पेजों को सर्वर पर ट्रांसफर करने की अनुमति देता है ताकि दूसरे यूजर उन तक पहुंच सकें।

एफ़टीपी क्लाइंट का उपयोग करके हम सर्वर पर फाइल को अपलोड, डाउनलोड, डिलीट, मूव, रीनेम और कॉपी कर सकते हैं। यदि आप FTP के माध्यम से अपनी फाइल भेजते हैं तो आपकी फाइलें मुख्य रूप से FTP सर्वर से अपलोड या डाउनलोड करती हैं। जब आप फ़ाइलें अपलोड कर रहे होते हैं तो आप फ़ाइलों को अपने पर्सनल कंप्यूटर (PC) से सर्वर पर स्थानांतरित यानि ट्रांसफर कर रहे होते हैं और जब आप फ़ाइल डाउनलोड कर रहे होते हैं तो आप फ़ाइल को सर्वर से अपने पर्सनल कंप्यूटर में स्थानांतरित कर रहे होते हैं।

How FTP works | फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल कैसे काम करता है?

एफ़टीपी एक क्लाइंट-सर्वर प्रोटोकॉल है और यह क्लाइंट और सर्वर के बीच दो कम्युनिकेशन चैनलों पर निर्भर करता है।

कंट्रोल कनेक्शन: 

एफ़टीपी क्लाइंट, उदाहरण के लिए, Filezilla या Filezilla pro आमतौर पर सर्वर पोर्ट नंबर 21 पर एक कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजता है। यह कंट्रोल कनेक्शन है। इसका उपयोग कमांड और प्रतिक्रिया भेजने और प्राप्त करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर एक उपयोगकर्ता को कनेक्शन स्थापित करने के लिए एफ़टीपी सर्वर पर लॉग ऑन करने की आवश्यकता होती है लेकिन कुछ सर्वर ऐसे होते हैं जो अपनी सभी सामग्री को बिना लॉगिन के उपलब्ध कराते हैं। इन सर्वरों को एनोनिमस FTP के रूप में जाना जाता है।

डेटा कनेक्शन: 

फाइल्स और फ़ोल्डर्स को स्थानांतरित करने के लिए हम डेटा कनेक्शन नामक एक अलग कनेक्शन का उपयोग करते हैं।

यह कनेक्शन दो तरह से स्थापित किया जा सकता है:

एक्टिव (सक्रिय) मोड: 

इस मोड में, उपयोगकर्ता FTP क्लाइंट पर सर्वर के पोर्ट 21 के लिए एक रैंडम पोर्ट (रैंडम पोर्ट 1) से कनेक्ट होता है। यह PORT कमांड भेजता है जो सर्वर को बताता है कि उसे क्लाइंट के किस पोर्ट से कनेक्ट होना चाहिए यानी (रैंडम पोर्ट 2)। सर्वर पोर्ट 20 से उस पोर्ट से जुड़ता है जिसे क्लाइंट ने देसिग्नेट (नामित) किया है यानी रैंडम पोर्ट 2। एक बार कनेक्शन स्थापित हो जाने के बाद डेटा ट्रांसफर इन क्लाइंट और सर्वर पोर्ट के माध्यम से होता है।

पैसिव (निष्क्रिय) मोड: 

ऐसी स्थिति में, जहां क्लाइंट कनेक्शन को स्वीकार नहीं कर सकता है, जैसे कि जब फ़ायरवॉल द्वारा ब्लॉक किया जाता है, तो पैसिव मोड का उपयोग करना पड़ता है। यह सबसे आम तरीका है क्योंकि आजकल क्लाइंट फ़ायरवॉल के पीछे है (जैसे बिल्ट-इन विंडोज फ़ायरवॉल)। 

इस मोड में, उपयोगकर्ता FTP क्लाइंट पर एक रैंडम पोर्ट (रैंडम पोर्ट 1) के द्वारा सर्वर के पोर्ट 21 से कनेक्ट होता है। यह PASV कमांड भेजता है जो क्लाइंट को बताता है कि कनेक्शन स्थापित करने के लिए उसे सर्वर के किस पोर्ट यानी (रैंडम पोर्ट 3) से कनेक्ट होना चाहिए। क्लाइंट रैंडम पोर्ट 2 से उस पोर्ट से जुड़ता है जिसे सर्वर ने डेसिगनेट (निर्दिष्ट) किया है यानी रैंडम पोर्ट 3। एक बार कनेक्शन स्थापित हो जाने के बाद डेटा ट्रांसफर इन क्लाइंट और सर्वर पोर्ट के माध्यम से होता है।

Advantages and Disadvantages of using FTP in hindi | एफ़टीपी का उपयोग करने के लाभ और नुकसान : 

 FTP ke advantages :

यह आपको मल्टिपल फाइल्स और फ़ोल्डर्स को ट्रांसफर करने की अनुमति देता है।

जब कनेक्शन खो जाता है तो यह ट्रांसफर को फिर से शुरू करने की क्षमता रखता है।

ट्रांसफर की जाने वाली फ़ाइल के आकार की कोई सीमा नहीं है। जहा ब्राउज़र केवल 2 जीबी तक के ट्रांसफर की अनुमति देते हैं।

FileZilla जैसे कई FTP क्लाइंट में ट्रांसफर शेड्यूल करने की क्षमता होती है।

डेटा ट्रांसफर HTTP से फ़ास्ट है।

जिन आइटम्स को अपलोड या डाउनलोड किया जाना है, उन्हें अनुक्रम में जोड़ा जाता है। FTP क्लाइंट अनुक्रम में आइटम जोड़ सकता है।

FTP ke disadvantages :

एफ़टीपी ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्ट नहीं करता है इसलिए यूज़रने, पासवर्ड और अन्य डेटा को डेटा पैकेट कैप्चर करके आसानी से पढ़ा जा सकता है क्योंकि ट्रांसफर करते समय उन्हें टेक्स्ट फॉर्मेट  में भेजा जाता है। एफ़टीपी पैकेट कैप्चर और अन्य हमलों की चपेट में है।

यह सब एफ़टीपी के बारे में है। आशा है आपको यह लेख  पढ़कर अच्छा लगा होगा।

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